हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , इस रिवायत को "बिहारूल अनवार" पुस्तक से लिया गया है। इस रिवायत का पाठ इस प्रकार है:
«عَنْ سَیْفٍ اَلتَّمَّارِ قَالَ سَمِعْتُ أَبَا عَبْدِ اَللَّهِ عَلَیْهِ اَلسَّلاَمُ یَقُولُ: عَلَیْکُمْ بِالدُّعَاءِ فَإِنَّکُمْ لاَ تَقَرَّبُونَ بِمِثْلِهِ وَ لاَ تَتْرُکُوا صَغِیرَةً لِصِغَرِهَا أَنْ تَدْعُوا بِهَا إِنَّ صَاحِبَ اَلصِّغَارِ هُوَ صَاحِبُ اَلْکِبَارِ».
हज़रत इमाम जफार सादीक अलैहिस्सलाम ने फरमाया:
मैं तुम्हें दुआ करने की सलाह देता हूँ क्योंकि दुआ के समान किसी और चीज़ के द्वारा तुम अल्लाह के करीब नहीं हो सकते। और किसी छोटी चीज़ के लिए दुआ करना इसलिए मत छोड़ो कि वह छोटी है,क्योंकि छोटी ज़रूरतें भी उसी के हाथ में हैं, जिसके हाथ में बड़ी ज़रूरतें हैं।
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